भजन संहिता 1 (Psalms 1)

Hindi Bible — Hindi (हिंदी)

1 क्या ही धन्य है वह पुरुष जो दुष्‍टों की युक्‍ति पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; और न ठट्ठा करनेवालों की मण्डली में बैठता है!

2 परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है।

3 वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है, और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। ⓐ इसलिये जो कुछ वह पुरुष करे वह सफल होता है।

4 दुष्‍ट लोग ऐसे नहीं होते, वे उस भूसी के समान होते हैं, जो पवन से उड़ाई जाती है।

5 इस कारण दुष्‍ट लोग अदालत में स्थिर न रह सकेंगे, और न पापी धर्मियों की मण्डली में ठहरेंगे;

6 क्योंकि यहोवा धर्मियों का मार्ग जानता है, परन्तु दुष्‍टों का मार्ग नष्‍ट हो जाएगा।

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