Hindi Bible — Hindi (हिंदी)
1 इसके बाद मैं ने पृथ्वी के चारों कोनों पर चार स्वर्गदूत खड़े देखे। वे पृथ्वी की चारों हवाओं को थामे हुए थे ताकि पृथ्वी या समुद्र या किसी पेड़ पर हवा न चले। ⓐ
2 फिर मैं ने एक और स्वर्गदूत को जीवते परमेश्वर की मुहर लिये हुए पूरब से ऊपर की ओर आते देखा; उसने उन चारों स्वर्गदूतों से जिन्हें पृथ्वी और समुद्र की हानि करने का अधिकार दिया गया था, ऊँचे शब्द से पुकारकर कहा,
3 “जब तक हम अपने परमेश्वर के दासों के माथे पर मुहर न लगा दें, तब तक पृथ्वी और समुद्र और पेड़ों को हानि न पहुँचाना।” ⓑ
4 जिन पर मुहर दी गई मैं ने उनकी गिनती सुनी, अर्थात् इस्राएल की सन्तानों के सब गोत्रों में से एक लाख चौवालीस हज़ार पर मुहर दी गई :
5 यहूदा के गोत्र में से बारह हज़ार पर मुहर दी गई; रूबेन के गोत्र में से बारह हज़ार पर, गाद के गोत्र में से बारह हज़ार पर।
6 आशेर के गोत्र में से बारह हज़ार पर, नप्ताली के गोत्र में से बारह हज़ार पर, मनश्शिह के गोत्र में से बारह हज़ार पर,
7 शमौन के गोत्र में से बारह हज़ार पर, लेवी के गोत्र में से बारह हज़ार पर, इस्साकार के गोत्र में से बारह हज़ार पर,
8 जबूलून के गोत्र में से बारह हज़ार पर, यूसुफ के गोत्र में से बारह हज़ार पर, और बिन्यामीन के गोत्र में से बारह हज़ार पर मुहर दी गई।
9 PHBiLzgpIfgpLjgpJXgpYcgKSsKS+KSmIOCkruCliOCkgiDgpKjgpYcgKSmKWDKSKWNoCNKSfKS/IOCkleClgCwgKSUKSwIOCkpuClh+CkluCliywgKSKSwIOCkj+CklSDgpJzgpLgpKTgpLgKSUKSwIOCkleClgeCksiDgpJTgpLAgKSyKWLKSXIOCklOCksCDgpKgpLgpLfgpLgKSuKWHKSCIOCkuOClhyDgpI/gpJUgKSQKSKWAIOCkrOCkoeCkvOClgCDgpKgpYDgpKHgpLwsIOCknOCkv+CkuOClhyDgpJXgpYvgpIggKSXKS/KSoIOCkqOCkueClgOCkgiDgpLjgpJXgpKTgpLgKSlKS+LCDgpLbgpYigIgpLXgpYfgpKQgKSKSKWNKSkKWNKSwwpgKSqKSKS/KSoKWHIOCklOCksCDgpIXgpKrgpKjgpYcgKSKS+KSlKWLKSCIOCkruClh+CkgiDgpJbgpJzgpYLgpLAgKSVKWAIOCkoeCkvuCksuCkv+Ckr+CkvuCkgSDgpLLgpL/gpK/gpYcgKSKWBKSPIOCkuOCkv+CkguCkueCkvuCkuOCkqCDgpJXgpYcgKSKS+KSuKSoKWHIOCklOCksCDgpKgpYfgpKgpYgpKjgpYcgKSVKWHIOCkuOCkvuCkruCkqOClhyDgpJbgpKHgpLzgpYAgKSKWILA==
10 और बड़े शब्द से पुकारकर कहती है, “उद्धार के लिये हमारे परमेश्वर का, जो सिंहासन पर बैठा है, और मेम्ने का जय-जय कार हो!”
11 और सारे स्वर्गदूत उस सिंहासन और प्राचीनों और चारों प्राणियों के चारों ओर खड़े हैं; फिर वे सिंहासन के सामने मुँह के बल गिर पड़े और परमेश्वर को दण्डवत् कर के कहा,
12 “आमीन! हमारे परमेश्वर की स्तुति और महिमा और ज्ञान और धन्यवाद और आदर और सामर्थ्य और शक्ति युगानुयुग बनी रहें। आमीन!”
13 PHBiLzgpIfgpLggKSqKSwIOCkquCljeCksOCkvuCkmuClgOCkqOCli+CkgiDgpKgpYfgpIIgKSKWHIOCkj+CklSDgpKjgpYcgKSuKWBKSdIOCkuOClhyDgpJXgpLngpLsIOKAnOCkr+ClhyDgpLbgpYigIgpLXgpYfgpKQgKSKSKWNKSkKWNKSwwpgKSqKSKS/KSoKWHIOCkueClgeCkjyDgpJXgpYzgpKggKSKWIKSCPyDgpJTgpLAgKSVKSKS+KSBIOCkuOClhyDgpIbgpIgKSKWIKSCP+KAnQ==
14 KSuKWIKSCIOCkqOClhyDgpIngpLjgpLjgpYcgKSVKSKS+LCDigJzgpLngpYcgKSKWNKSKS+KSuKWALCDgpKTgpYIgKSKWAIOCknOCkvuCkqOCkpOCkviDgpLngpYjgpaTigJgKSJKSKSoKWHIOCkruClgeCknSDgpLjgpYcgKSVKSKS+LCDigJzgpK/gpYcgKSKWHIOCkueCliOCkgiwgKScKWLIOCkieCkuCDgpKgpLngpLgpJXgpYgpLLgpYfgpLYgKSuKWHKSCIOCkuOClhyDgpKjgpL/gpJXgpLLgpJXgpLAgKSGKSPIOCkueCliOCkgjsZjigInikLigIkLY+IOCkh+CkqOCljeCkueCli+CkguCkqOClhyDgpIXgpKrgpKjgpYctKSFKSqKSoKWHIOCkteCkuOCljeCkpOCljeCksMKdIOCkruClh+CkruCljeCkqOClhyDgpJXgpYcgKSyKSKWCIOCkruClh+CkgiDgpKfgpYvgpJXgpLAgKSKWNoCNKSKWHKSkIOCkleCkv+CkjyDgpLngpYjgpILgpaQ=
15 “इसी कारण वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने हैं, और उसके मन्दिर [] में दिन-रात उसकी सेवा करते हैं, और जो सिंहासन पर बैठा है, वह उनके ऊपर अपना तम्बू तानेगा।
16 वे फिर भूखे और प्यासे न होंगे; और न उन पर धूप, न कोई तपन पड़ेगी। ⓓ
17 क्योंकि मेम्ना जो सिंहासन के बीच में है उनकी रखवाली करेगा, ⓔ और उन्हें जीवन रूपी जल के सोतों के पास ले जाया करेगा; ⓕ और परमेश्वर उनकी आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा।” ⓖ